राही 

​भटके राही से हो गये हैं हम।  न रास्ते का अता है,  और न ही मंजिल का पता है।। किसी और को हमराही न बना सके।  बस यही हमारी खता है।।  ©thekushofficial

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नासमझी 

​मेरी सोच में तुम समझदार हो।  मेरी समझ में तुम नासमझ।।  और मेरी नासमझी तो देखो, कि  मैं किससे ये जतीया रहा।  आईने से ही सबकुछ बतीया रहा।।  ©thekushofficial

इंसानियत 

​मैं तेरा ही एक हिस्सा हूँ।  मगर अब, सिर्फ एक किस्सा हूँ।।  अब मैं कहां तेरे अंदर दिखती हूँ।  हर दिन, सरे आम,  कौड़ियों के भाव बिकती हूँ।।  क्या हो गया तुझे, तू यूं तो न था।  अपने मतलब के आगे,  इतना मजबूर तो न था।।  तेरी हरकतें देखकर, मैं डर रही हूँ।  उन्हें होता... Continue Reading →

बचपन (CHILDHOOD) 

​बचपन, कितना अजीब था। हर कोई, दिल के करीब था।। कहने को तो कुछ खास नहीं। पर फिर भी, ज़ह-नसीब था।। पिता का उसमें प्यार था। और मां का उसमें दुलार था।। लाड़ प्यार से भरे बचपन में। बसता अलग संसार था।। स्कूल के लिए बहाना था। एक दिन का नहीं, रोज़ाना था।। मगर, फायदा... Continue Reading →

शब्द 

​ मैं शब्द हूँ।  जब बोला जाता हूँ। तो बात बन जाता हूँ।।  और जब लिखा जाता हूँ। तो इतिहास बन जाता हूँ।। मैं शब्द हूँ।  कोई कह न पाए। तो जज्बात बन जाता हूँ।।  और अगर समझ लो। तो एहसास बन जाता हूँ।।  मैं शब्द हूँ। पुकारा जाऊं। तो आवाज़ बन जाता हूँ।।  अगर... Continue Reading →

बादल 

Again you reminded me those rainy days Here I use a Himanchali local language word "barte" which is actual meaning is "barste".

मगरूर

मशहूर हो गये जो, तो  मगरूर हो गये वो।  शोहरत के सरूर में, हमसे  दूर हो गये वो।।  ©thekushofficial  

दर्द

शब्द तो बहुत हैं,  अपना दर्द बयान करने को। लेकिन बदकिस्मती से, हम  वो भी नहीं कर सकते।।  कहते हैं दर्द बांटने से कम होता है।  और हम एक उसी के सहारे तो जी रहे हैं।।  ©thekushofficial Post by :thekushofficial मेरा दर्द ही मेरा मरहम है।

आज़माइश

​खुला हूँ, खुली किताब की तरह। लेकिन किताब मत समझना।।  जी रहा हूं मुर्दों कि तरह। लेकिन इतिहास मत समझना।।  तेरी राह में कांटों सी चुभन लेकर आयेंगे कई लोग।  वो सिर्फ एक आज़माइश है। उसे अपना तिरस्कार मत समझना।।  ©thekushofficial God is always trying you in the role of your haters.... 

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